अपने ही देश में पराए: आज के भारत में हिंदुओं की स्थिति ✍️ By: विवेक मोहला, अधिवक्ता (Advocate Vivek Mohla)

 



Title: अपने ही देश में पराए: आज के भारत में हिंदुओं की स्थिति
✍️ By: विवेक मोहला, अधिवक्ता (Advocate Vivek Mohla)


“जिस धरती पर वेदों की ऋचाएं गूंजीं, आज वहां गीता पढ़ना भी अपराध बनता जा रहा है। यह कैसा भारत बन रहा है, जहां बहुसंख्यक को ही अपनी पहचान और अस्तित्व के लिए लड़ना पड़ रहा है?”

भारत को हजारों वर्षों से धर्मभूमि, संस्कृति की जननी, और सनातन परंपरा का ध्वजवाहक माना गया है। लेकिन आज उसी भारत में हिंदू समाज असुरक्षित, उपेक्षित और तिरस्कृत महसूस कर रहा है। तुष्टिकरण, वोट बैंक की राजनीति और असंतुलित सेक्युलरिज़्म के चलते बहुसंख्यक हिंदू समाज को हर मोर्चे पर पीछे धकेला जा रहा है।


🔥 तुष्टिकरण की राजनीति और हिंदुओं की अनदेखी

आज राजनीति का मुख्य केंद्र वोट बैंक बन गया है, और इसके लिए सबसे आसान रास्ता है—हिंदू समाज की उपेक्षा।

  • मंदिरों पर प्रतिबंध, लेकिन मस्जिदों पर मौन।
  • सूर्य नमस्कार और वेदपाठ ‘धर्मनिरपेक्षता’ के खिलाफ, लेकिन अन्य धार्मिक क्रियाएं ‘संविधानिक अधिकार’।
  • दिवाली पर पर्यावरण की चिंता, लेकिन अन्य त्योहारों पर सरकार की चुप्पी।

यह दोहरापन एक बहुसंख्यक समाज के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुँचाता है।


🛕 मंदिरों पर सरकार का कब्जा, धार्मिक आज़ादी पर बंदिशें

आज देश के सैकड़ों मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं, जबकि चर्चों और मस्जिदों की संपत्तियों को कोई छू भी नहीं सकता।

  • मंदिरों की आय सरकारी खजाने में जाती है।
  • पुजारियों को वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
  • धार्मिक शिक्षा संस्थानों पर पाबंदियाँ, लेकिन मदरसों को सब्सिडी और स्वतंत्रता।

क्या यह समानता है? क्या यह धर्मनिरपेक्षता है?


🔄 धर्मांतरण और सांस्कृतिक हमला – सुनियोजित रणनीति

आज हिंदू समाज को लव जिहाद, लैंड जिहाद, जनसंख्या जिहाद, और धर्मांतरण जिहाद जैसी योजनाबद्ध साजिशों का सामना करना पड़ रहा है।

  • भोले-भाले ग्रामीणों और जनजातीय इलाकों में लालच और धोखे से धर्मांतरण।
  • युवाओं को भ्रमित कर सांस्कृतिक अलगाव पैदा करना।
  • फिल्मों, वेब सीरीज़ और सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदू आस्था और प्रतीकों का उपहास।

यह सब कुछ एक बहुत गहरी साज़िश का हिस्सा लगता है, जिसका उद्देश्य है—भारत की आत्मा को ही बदल डालना।


📺 बुद्धिजीवी और मीडिया द्वारा हिंदू विरोध को सामान्य बनाना

आज ‘हिंदू’ शब्द को ही रूढ़िवादी, कट्टरपंथी और अप्रगतिशील बना दिया गया है।

  • हिंदू प्रतीकों का मजाक कॉमेडी बन गया है।
  • राम और कृष्ण पर सवाल उठाना ‘बौद्धिकता’ माना जाता है।
  • लेकिन यदि कोई दूसरे धर्म पर सवाल करे, तो तुरंत ‘असहिष्णुता’ और ‘संविधान विरोध’ का तमगा दे दिया जाता है।

यह नैरेटिव वॉर है—और इसमें हिंदू समाज लगातार हार रहा है।


अब चुप रहना गुनाह है: हिंदू समाज को एकजुट होना होगा

यह समय है जागरूकता, एकता और संगठित प्रयास का।

  • हमें मंदिरों की स्वतंत्रता के लिए आवाज़ उठानी होगी।
  • समान नागरिक संहिता, समान शिक्षा नीति और समान जनसंख्या नीति की मांग करनी होगी।
  • हमें जाति-भेद, क्षेत्रवाद और राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर हिंदू हित और राष्ट्रहित के लिए एकजुट होना होगा।

"धर्मो रक्षति रक्षितः" — जो धर्म की रक्षा करता है, वही स्वयं की रक्षा करता है।

यदि अब भी हम नहीं जागे, तो अगली पीढ़ियों के लिए हम केवल एक शर्मनाक विरासत छोड़ जाएंगे।

यह समय है—खुद को, अपनी संस्कृति को और अपने धर्म को पहचानने का।
भारत तभी बचेगा, जब हिंदू बचेगा।
और हिंदू तभी बचेगा, जब वह एकजुट होगा।


✍️ विवेक मोहला
अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायालय
📞 9818098185 | 🌐 www.vivekmohla.com
📩 vivekmohla9818@gmail.com
🇮🇳 जय हिंद, जय सनातन!

 

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